डॉ. तीजन बाई का जीवन परिचय (Dr. Teejan Bai Biography) – विश्व प्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, समर्पण और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की एक अद्वितीय कहानी है। उन्होंने एक ऐसी कला को पुनर्जीवित किया, जो कभी केवल पुरुषों तक सीमित थी और उसे वैश्विक शीर्ष स्तर पर गौरव दिलाया है।

डॉ. तीजन बाई: पंडवानी लोककला की पहचान
डॉ. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक ऐसी महान लोक गायिका है, जिन्होंने पंडवानी जैसी क्षेत्रीय लोक कला को न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। वे अपनी विशिष्ट गायन शैली, बुलंद आवाज और तंबूरे के अद्भुत प्रयोग के लिए जानी जाती है।
1. परिचय – जन्म एवं पारिवारिक पृष्ठभूमि
| पूरा नाम | डॉ. तीजन बाई |
| जन्म तिथि | 24 अप्रैल 1956 |
| जन्म स्थान | गनियारी गांव, भिलाई, जिला-दुर्ग (छ.ग.) |
| समुदाय | पारधी समुदाय (यह समुदाय छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में निवास करता है और पारंपरिक रूप से काले पक्षियों का शिकार करता है) |
| पिता का नाम | श्री चुनुकलाल |
| माता का नाम | श्रीमती सुखवती |
| प्रारंभिक गुरु | नाना ब्रजलाल |
| औपचारिक गुरु | उमेद सिंह देशमुख |
| प्रमुख विधा | पंडवानी (कापालिक शैली) |
| निधन तिथि | 5 जुलाई 2026 |
2. प्रारंभिक शिक्षा और कलात्मक विकास
तीजन बाई ने बचपन से ही अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कहानियाँ सुनी और उन्हें याद किया।
- प्रारंभिक गुरु: उनके नाना ब्रजलाल।
- औपचारिक गुरु: उमेद सिंह देशमुख।
- प्रथम कला प्रदर्शन: 13 वर्ष की आयु में उन्होंने पड़ोसी गाँव चंद्रखुरी में अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन से खुश होकर ग्रामीणों ने उन्हें एक बोरा धान दिया था, जिसे बेचकर उन्होंने अपने घर की छत बनवाई थी।
3. पंडवानी कला और तीजन बाई की शैली
पंडवानी का अर्थ है ‘पांडवों की वाणी’ या महाभारत की कथा का छत्तीसगढ़ी लोक भाषा में गायन। तीजन बाई ने इस कला में एक क्रांतिकारी बदलाव किया। उनकी पड़वानी कला को मंच पर ‘कापालिक शैली‘ उकेरती थी।
- शैलियों का अंतर:
- वेदमती शैली: इसमें कलाकार बैठकर, चेहरे के भावों (Facial Expressions) के माध्यम से गायन करता है।
- कापालिक शैली: इसमें कलाकार खड़े होकर, घूम-घूमकर और अभिनय करते हुए हुंकार भरकर गायन करता है।
- ऐतिहासिक कदम: पहले कापालिक शैली केवल पुरुषों द्वारा अपनाई जाती थी, लेकिन तीजन बाई पहली महिला बनी, जिन्होंने इस शैली में पंडवानी का प्रदर्शन किया।
- तंबूरा का प्रयोग: तीजन बाई अपने हाथ में तंबूरा रखती है, जो प्रदर्शन के दौरान कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष, तो कभी द्रौपदी के बाल को दर्शाया जाता था।
4. जीवन संघर्ष और सामाजिक बहिष्कार
तीजन बाई का कलात्मक सफर आसान नही था। उस दौर में महिलाओं का मंच पर आकर पंडवानी गाना वर्जित माना जाता था।
- सामाजिक विरोध: समाज ने उनका विरोध किया और उन्हें अपमानित किया।
- पारिवारिक संघर्ष: पंडवानी गाने के कारण उनके पति ने भी उन्हें प्रताड़ित किया, जिसके चलते वे कुछ समय तक अपने पति से अलग भी रहीं।
- संकल्प: इन सब बाधाओं के बावजूद उन्होंने पंडवानी का त्याग नहीं किया और अपनी कला को जारी रखा।
5. राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पहचान
तीजन बाई की प्रतिभा को निखारने में प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर का बड़ा हाथ रहा।
- इंदिरा गांधी के समक्ष प्रस्तुति: हबीब तनवीर के सहयोग से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने प्रदर्शन किया, जिससे उनके जीवन की दिशा बदल गई।
- अंतर्राष्ट्रीय मंच: उन्होंने अपना पहला अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन फ्रांस (पेरिस) में ‘भारत महोत्सव’ के दौरान दिया।
- सांस्कृतिक राजदूत: 1980 के दशक में वे इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, रूस, जापान, और ऑस्ट्रेलिया जैसे 13 से अधिक देशों में भारत की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में गई।
6. पुरस्कार एवं सम्मान (तालिका)
| वर्ष | पुरस्कार/सम्मान का नाम | प्रदानकर्ता/संस्था |
|---|---|---|
| 1988 | पद्मश्री * | भारत सरकार |
| 1995 | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार | संगीत नाटक अकादमी |
| 2003 | पद्म भूषण * | भारत सरकार |
| 2003 | मानद डी.लिट. | बिलासपुर विश्वविद्यालय |
| 2006 | मानद डी.लिट. | पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय |
| 2018 | फुकुओका पुरस्कार | जापान सरकार |
| 2019 | पद्म विभूषण * | भारत सरकार |
* विशेष तथ्य: तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एकमात्र ऐसी व्यक्तित्व है, जिन्हें तीनों पद्म पुरस्कारों (पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण) से सम्मानित किया गया है।
7. निधन और विरासत
- निधन: डॉ. तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ।
- कलाग्राम: छत्तीसगढ़ सरकार ने उनके गाँव गनियारी को ‘कलाग्राम’ के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।
- तंबूरा का संरक्षण: उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में संरक्षण और प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा।
- राज्य सम्मान: प्रदेश सरकार द्वारा उनके नाम पर ‘डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान’ की स्थापना की जाएगी, जो पंडवानी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को दिया जाएगा। जिसे 26वां राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर 2026 पर दिया जायेगा।
8. महत्वपूर्ण तथ्य और विचार
- प्रेरणा: तीजन बाई का मानना था, “जो बैठ जाता है उसकी तकदीर भी बैठ जाती है, और जो उठकर चलने लगता है उसकी तकदीर भी उठ खड़ी होती है”।
- सादा जीवन: इतनी प्रसिद्धि के बाद भी वे हमेशा स्वयं को एक साधारण गाँव की महिला मानती रही और लोगों से उसी सादगी से मिलती रही।
- साहित्यिक आधार: पंडवानी गायन सबल सिंह चौहान की रचना ‘छत्तीसगढ़ी महाभारत’ (दोहा और चौपाई) पर आधारित है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
उत्तर- डॉ. तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एक विश्व विख्यात लोक गायिका है, जिन्होंने ‘पंडवानी’ लोक कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वे पंडवानी की कापालिक शैली की पहली महिला कलाकार मानी जाती है।
उत्तर- उनका जन्म 24 अप्रैल 1956 को छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में स्थित गनियारी गाँव में हुआ था। वे पारधी समुदाय से संबंधित थी।
उत्तर- तीजन बाई ने पंडवानी का प्रारंभिक प्रशिक्षण अपने नाना ब्रजलाल से प्राप्त किया था। उनके औपचारिक गुरु उमेद सिंह देशमुख थे।
उत्तर- कापालिक शैली में कलाकार खड़े होकर, घूम-घूमकर और अभिनय करते हुए कथा की प्रस्तुति देता है। तीजन बाई पहली महिला थी, जिन्होंने इस शैली को अपनाया, क्योंकि इससे पहले यह केवल पुरुषों तक सीमित थी।
उत्तर- तीजन बाई अपने हाथ में पकड़े तंबूरे का उपयोग केवल संगीत के लिए ही नहीं, बल्कि दृश्यों को सजीव बनाने के लिए भी करती थी। वे इसे कभी भीम की गदा, कभी अर्जुन का धनुष, तो कभी द्रौपदी के बाल के प्रतीक के रूप में उपयोग करती थी।
उत्तर- वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र व्यक्तित्व हैं जिन्हें तीनों पद्म पुरस्कार मिले है:- पद्मश्री (1988), पद्म भूषण (2003), पद्म विभूषण (2019)। इसके अलावा उन्हें 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला।
उत्तर- तीजन बाई ने अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रस्तुति फ्रांस की राजधानी पेरिस में ‘भारत महोत्सव’ के दौरान दी थी। इसके बाद उन्होंने 13 से अधिक देशों में पंडवानी का प्रदर्शन किया।
उत्तर- पंडवानी मुख्य रूप से सबल सिंह चौहान की रचना ‘छत्तीसगढ़ी महाभारत’ पर आधारित है, जो पद्य शैली (दोहा और चौपाई) में लिखी गई है।
उत्तर- विश्व प्रसिद्ध पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई का निधन 5 जुलाई 2026 को हुआ।
उत्तर- छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने बहुत सी घोषणाएँ की है- (1) उनके गाँव गनियारी को ‘कलाग्राम’ के रूप में विकसित करना। (2) उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय में संरक्षित करना। (3) उनके नाम पर ‘डॉ. तीजन बाई राज्य सम्मान’ की स्थापना करना।
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