मध्यकालीन भारत के प्रमुख राजवंश, शासक | Dynasties Rulers of Medieval India

मध्यकालीन भारत के प्रमुख राजवंश एवं शासक कार्यकाल (Major Dynasty and Rulers of Medieval India | Rulers and Dynasty Name List) प्राचीन भारतीय इतिहास (Medieval history of India) में मध्यकालीन भारत के प्रमुख राजवंश और शासक का नाम एवं उनके द्वारा भारत में किये गये आक्रमण सहित निर्माण/स्थापित कार्यकाल संबंधी जानकारी दी गई है। मध्यकालीन भारत के कुछ महत्वपूर्ण राजवंश एवं उनके कार्यकाल (medieval rulers of India) इस प्रकार हैं:-

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मध्यकालीन भारत के प्रमुख वंश एवं शासक कार्यकाल | Medieval Rulers of India

मध्यकालीन भारत के प्रमुख राजवंश का नाम- गुलाब वंश, खिलजी वंश, तुगलक वंश, लोदी वंश, मुग़ल वंश और सूर वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

भारत के मध्यकालीन इतिहास में मोहम्मद बिन कासिम, भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम अरब मुस्लिम था, जिसने सिंध व मुल्तान को (712 ई.) में जीत लिया था।

महमूद गजनवी (971-1030 AD)

महमूद गजनवी का 971 से 1030 AD तक शासन कार्यकाल माना जाता है। यह ‘गजनाविद’ का प्रमुख शासक था।

इसे महमूद-ए-ज़बूली के नाम से भी जाना जाता था। महमूद गजनवी ‘सुबक्त्गीन’ का पुत्र था।

महमूद गजनवी ने भारत पर 1001 ई. से 1027 ई. के बीच कुल 17 बार आक्रमण किया था।

इसका मुख्य उद्देश्य भारत की संपत्ति को लूटना, हिंदु धार्मिक मूर्ति खंडित कर इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार करना था।

महमूद ग़ज़नवी ने भारत पर पहला आक्रमण 1001 ई. में पेशावर (वैहिंद युद्ध) पर क्षेत्राधिकार के लिए किया था।

1025 ई. में उसका भारत में ‘सोमनाथ के शिव मंदिर’ पर आक्रमण सबसे प्रसिद्ध है। इसका अलबरुनी यात्रा वृतान्त में मंदिर का उल्लेख पाया जाता है। 

महमूद गजनवी का गुजरात आक्रमण के समय, गुजरात पर भीमसेन प्रथम का शासन स्थापत्य था।

मेहमूद गजनवी का दरबारी (कवि) लेखक ‘अलबरूनी’ था, जो गजनवी के साथ भारत आया था।

1030 AD में (30 अप्रैल 1030) को महमूद गजनवी की मृत्यु मलेरिया के कारण हो गई।

महमूद गजनवी द्वारा किये गए आक्रमण की सूची

क्र. समयस्थल का नामशासक का नाम 
1.1000 ADअफ़्गानिस्तान और पाकिस्तानजयपाल
2.1005 AD भाटिया आनंदपाल
3.1006 AD मुल्तान आनंदपाल
4.1007 AD भटिंडा सुखपाल
5.1011 AD पंजाब (नगरकोट) आनंदपाल
6.1013 ADपेशावर (वैहिंद युद्ध) आनंदपाल
7.1014 ADथानेसर
8.1015 ADकश्मीर
9.1018 ADमथुरा चन्द्रपाल
10.1021 ADकनौज चन्देल्ला गौड़
11.1023 ADग्वालियर
12.1025 ADसोमनाथ मंदिर (पाटण शहर)गुजरात का शासक राजा भीमदेव

मोहम्मद गौरी (1173-1206 ई.) 

महमूद गजनवी के विपरीत, मोहम्मद गौरी (पूरा नाम –शहाब-उद-दीन मुहम्मद ग़ोरी) ने भारत पर आक्रमण का उद्देश्य भारत में ‘मुस्लिम राज्य’ की स्थापना करना था।

12 वीं शताब्दी में गोरी वंश का उदय तथा ‘अला-उद-दीन जहानोज’ ने गोर वंश की नींव रखी। उसका पुत्र का नाम ‘सैफ-उद-दीन गोरी’ था।

मुहम्मद गौरी, गजनी और हेरात के मध्य क्षेत्र गजनी का एक शासक था। मुहम्मद गौरी ‘शंसबनी वंश’ से था।मोहम्मद गौरी के पिता का नाम ‘बहाउद्दीन साम बिन हुसैन’ था।

1175 ई. में मुहम्मद गौरी ने प्रथम आक्रमण भारत के ‘मुल्तान पर आक्रमण’ किया। जिस समय करमाथ जाति के मुस्लिम शासकों का राज्य था।

1178 ई. में मुहम्मद गौरी ने द्वितीय आक्रमण भारत के ‘गुजरात पर आक्रमण’ किया। जिस पर भारत में मुहम्मद गौरी की यह पहली पराजय ‘मूलराज द्वितीय’ ने आबू पर्वत की तलहटी में पराजित किया था।

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के बीच दो लड़ाईयां हुई- तराईन का प्रथम युद्ध (1191 ई.), जिसमें गौरी की पराजय हुई तथा तराईन का द्वितीय युद्ध (1192 ई.) जिसमें पृथ्वीराज चौहान की पराजय हुई।

1202 ई. में गौरी साम्राज्य का शासक ‘शहाब-उद-दीन मुहम्मद गोरी’ बना। जो 12वीं शताब्दी का अफ़गान सेनापति था।

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15 मार्च, 1206 में खोखर नामक जाटों उपसमूह के लोगों ने आधुनिक पाकिस्तान के झेलम नदी क्षेत्र में नदी किनारे मुहम्मद ग़ोरी से बदला लेने के लिए उसे मार डाला।

शहाब-उद-दीन मुहम्मद ग़ोरी का मकबरा सोहावा झेलम (पाकिस्तान) में बना है। मोहम्मद गौरी ने कुछ सिक्के चलाये थे, जो लक्ष्मी की आकृति वाले दिखाई देते थे।

मोहम्मद गौरी को पराजित करने वाला भारत का पहला शासक ‘मूलराज द्वितीय’ था। जिसने सन् 1165 में मुल्तान पर आक्रमण किया था, मुल्तान पर करमाथी जाति के मुसलमान शासक था। जिन्होंने मोहम्मद गौरी को आबू पर्वत की तलहटी में पराजित कर दिया।

मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद दिल्ली का शासक ‘ग़ुलाम क़ुतुब-उद-दीन ऐबक’ बना। माना जाता है की सन् 1215 के पश्चात ग़ोरी साम्राज्य विस्थापित हो गई।

गुलाम वंश (1206 ई.-1290 ई.)

मध्यकालीन भारत के गुलाब वंश का कार्यकाल 1206 ई.-1290 ई. तक माना जाता है। गुलाब वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

कुतुबुद्दीन ऐबक (1206 ई.-1210 ई.)

मध्यकालीन भारत में दिल्ली सल्तनत का पहला शासक एवं गुलाम वंश का संस्थापक तुर्की सुल्तान ‘कुतुबुद्दीन ऐबक’ था। बचपन में ‘कुरान खाँ’ के नाम से भी जाना जाता था। 

कुतुबुद्दीन ऐबक के गुरु काजी था। जिसकी मृत्यु पश्चात उसके पुत्रों ने व्यापारी द्वारा गजनी लाकर मुहम्मद गौरी को बेचा (गुलाम) बनाया गया।

कुतबुद्दीन ऐबक को ‘लाखबख्श’, एक वीर एवं उदार सुल्तान के कारण कहा जाता था। जो लाखों में दान दिया करता था। जिसका उल्लेख प्रसिद्ध इतिहासकार ‘मिनहाजुद्दीन सिराज’ ने किया है।

पहले इसकी राजधानी लाहौर थी, बाद में दिल्ली बनी। इसने ‘कुतुबमीनार का निर्माण’ कार्य प्रारंभ करवाया। उत्तर भारत में पहला मुस्लिम राज्य स्थापित किया।

कुतुबमीनार का नाम, प्रसिद्ध सूफी ख्वाजा ‘कुतुबद्दीन बख्तियार काकी’ के नाम पर रखा गया है।

कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु लाहौर में चौगान (पोलो) खेलते हुए घोड़े से गिर जाने से हुई थी।

कुतुबुद्दीन ऐबक का उत्तराधिकारी ‘इल्तुमिश’ बना। इल्तुतमिश का मकबरा, कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स (कुतुब परिसर), टोम्ब ऑफ़ इल्तुतमिश, दिल्ली में अवस्थित है।

इल्तुतमिश (1210 ई.-1236 ई.)

इसने कुतुबमीनार को बनवाकर पूरा किया और राज्य को सुदृढ़ व स्थिर बनाया।

इसने चालीस योग्य तुर्क सरदारों के एक दल ‘चालीसा दल (चहलगानी)’ या ‘तुर्कान-ए-चिहलगानी’ का गठन किया।

रजिया सुल्तान (1236 ई.-1240 ई.)

रजिया दिल्ली की प्रथम व अंतिम मुस्लिम महिला शासिका थी।

बलबन (1266 ई.-1286 ई.)

बलबन ने पारसी नववर्ष के आरंभ में मनाए जाने वाले उत्सव ‘नौरोज‘ की भारत में शुरूआत की।

सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए बलबन ने दरबार में ‘सिजदा‘ (घुटनों के बल बैठकर सुल्तान के सामने सिर झुकाना) तथा ‘पाबोस‘ (पेट के बल लेटकर सुल्तान के पैरों को चूमना) प्रथाएं शुरू की थी।

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खिलजी वंश (1290 ई.-1320 ई.)

मध्यकालीन भारत के खिलजी वंश का कार्यकाल 1290 ई.-1320 ई. तक माना जाता है। खिलजी वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

अलाउद्दीन खिलजी (1296 ई.-1316 ई.)

अलाउद्दीन खिलजी को द्वितीय सिकन्दर कहा जाता है।

वह प्रथम शासक था जिसने स्थायी सेना गठित की, सैनिकों को नकद वेतन, घोड़ों को दागने की प्रथा तथा सैनिकों के लिए ‘हुलिया प्रणाली’ आरंभ किया।

अलाउद्दीन ने ‘बाजार नियंत्रण प्रणाली’ की स्थापना की थी।

तुगलक वंश (1320 ई.-1414 ई.)

मध्यकालीन भारत के तुगलक वंश का कार्यकाल 1290 ई.-1320 ई. तक माना जाता है। तुगलक वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

मुहम्मद बिन तुगलक (1325 ई.-1351 ई.)

इसे इतिहास में एक अदूरदर्शी शासक के रूप में जाना जाता है।

इसने 1327 ई. में अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरि (दौलताबाद) स्थानांतरित की।

उसने कृषि के विकास के लिए ‘दीवान-ए-कोही‘ नामक विभाग की स्थापना की।

1334 ई. में मोरक्को का प्रसिद्ध यात्री इब्नबतूता भारत आया। उसने दिल्ली में आठ वर्षो तक काजी का पद संभाला।

फिरोजशाह तुगलक (1351 ई.-1388 ई.)

उसने सेना में वंशवाद को बढ़ावा दिया तथा सैनिकों को वेतन के रूप में भूमि प्रदान की।

फिरोजशाह नेहिसार, फिरोजाबाद, फतेहाबाद, फिरोजशाह कोटला, जौनपुर आदि नगरों की स्थापना की।

उसने फारसी भाषा में आपनी आत्मकथा ‘फुतुहत-ए-फिरोजशाही‘ की रचना की।

लोदी वंश (1451 ई.-1526 ई.)

मध्यकालीन भारत के लोदी वंश का कार्यकाल 1290 ई.-1320 ई. तक माना जाता है। लोदी वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

बहलोल लोदी (1451 ई.-1489 ई.)

इस बहलोल वंश की स्थापना ‘बहलोल लोदी’ ने किया था।

दिल्ली सल्तनत में शासन करने वाला यह प्रथम अफगान वंश था।

सिकंदर लोदी (1489 ई.-1517 ई.)

उसने 1504 ई. आगरा शहर की स्थापना की और 1506 ई. में इसे अपनी राजधानी बनाया।

सिकंदर लोदी ‘गुलरूखी‘ के उपनाम से फारसी में कविताएं लिखता था।

इब्राहिम लोदी (1517 ई.-1526 ई.)

इब्राहिम लोदी 1526 ई. के पानीपत का प्रथम युद्ध में बाबर के हाथों मारा गया और इसी के साथ दिल्ली सल्तनत का शासन काल समाप्त हो गया।

मुगल वंश (1526 ई.-1587 ई.)

मध्यकालीन भारत के मुगल वंश का कार्यकाल 1290 ई.-1320 ई. तक माना जाता है। मुगल वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:-

बाबर (1526 ई.-1530 ई.)

वह अपने पिता की तरफ से तैमूर (तुर्क) का तथा माता की तरफ से चंगेज खां (मंगोल) का वंश था।

पानीपत का प्रथम युद्ध (1526 ई.) में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल वंश की स्थापना किया।

हुमायूँ (1530 ई.-1540 ई. और 1555 ई.-1556 ई.)

उसका प्रमुख शत्रु शेहशाह सूरी था जिसने उसे ‘चौसा के युद्ध’ (1539 ई.) में पराजित किया और 1540 ई. में ‘कन्नौज का युद्ध (बिलग्राम)‘ में पराजित करके भारत से बाहर चले जाने के लिए बाध्य कर दिया। जून 1555 में ‘सरहिन्द का युद्ध (सिकंदर सूर व बैरम खां के मध्य)‘ में विजय प्राप्त कर पुनः दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

अकबर (1556 ई.-1605 ई.)

जलाल उद्दीन मोहम्मद अकबर का जन्म 1542ई. में, हुमायूँ के प्रवास काल के दौरान, अमरकोट में हुआ था।

अकबर ने बैरम खां की सहायता से 1556 ई. में पानीपत का द्वितीय युद्ध में हेमू ने ‘विक्रमादित्य‘ को पराजित किया।

1576 ई. के ‘हल्दीघाटी के युद्ध’ में राजा मानसिंह ने मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप को पराजित किया।

जहांगीर (1605 ई.-1627 ई.)

जहांगीर का विवाह 1611 ई. में शेर-ए-अफगान की विधवा ‘मेहरून्निसां’ से हुआ, जो बाद में ‘नूरजहां’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।

उसने राज्य की जनता को न्याय दिलाने हेतु न्याय की प्रतीक सोने की जंजीर को अपने महल के बाहर लगवाया।

जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला चरम आकर्षण पर थी। medieval rulers of india

उसने स्वयं अपना व अपनी बेगम मुमताज महल का मकबरा आगरा में बनवाया, जो ‘ताजमहल‘ के नाम से प्रसिद्ध है।

शाहजहां (1627 ई.-1658 ई.)

शाहजहां ने आगरा में मोती मस्जिद तथा दिल्ली में ‘लाल किला’‘जामा मस्जिद’ का निर्माण करवाया था।

औरंगजेब (1658 ई.-1707 ई.)

शाहजहां के उत्तराधिकार को लेकर दारा और औरंगजेब के मध्य 25 अप्रैल 1658 में ‘घरमत का युद्ध‘ (पराजित), 8 जून 1658 में ‘सामूगढ़ का युद्ध‘ (पराजित), 12 से 14 अप्रैल 1658 को ‘देवराई की घाटी युद्ध‘ में दारा पराजित व औरंगजेब ने दारा की हत्या करवा दी।

दिल्ली के लाल किले में स्थित ‘मोती मस्जिद’ का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था।

सूर वंश (1540 ई.-1555 ई.)

मध्यकालीन भारत के सूर वंश का कार्यकाल 1540 ई.-1555 ई. तक माना जाता है। सूर वंश के शासकों की जानकारी निम्नानुसार है:- medieval rulers of india

शेरशाह सूरी (1540 – 1545 ई.)

शेरशाह का मूल नाम ‘फरीद’ था। उसे ‘शेरखान’ की उपाधि बिहार के गवर्नर बहार खान लोहानी ने दी थी।

कालिंजर के अभियान में एक गोले के विस्फोट से शेरशाह की मृत्यु हो गयी थी तथा इसे सहसराम, बिहार में दफनाया गया।

शेरशाह ने लाहौर से बंगाल तक ‘ग्रांड ट्रंक रोड’ का निर्माण करवाया व इसने चांदी का ‘रूपया‘ व तांबे का ‘दाम‘ प्रचलित किया। इसी के शासनकाल में पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी) की रचना हुई थी।

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