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वैक्सीन (टीका) क्या होता है? | India Corona Vaccine in Hindi

विश्व और पूरे भारत में कोरोना (Corona Vaccine in India) जैसे वायरस महामारी (Covid-19 pandemic) ने पूरी तरह से आर्थिक और सामाजिक ढांचा कमजोर हो गया है। यह कोरोना वायरस क्या है? उसके फैलाव को ख़त्म करने हेतु राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मेडिकल संस्थाओं द्वारा विभिन्न वैक्सीन की खोज (India research vaccine in hindi) किया गया है।

कोरोना वायरस (Covid-19 virus) एक प्रकार का RNA वायरस होता है। COVID-19 विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 11 फरवरी, 2020 को ‘नोवेल कोरोनावायरस’ SARS-CoV2 के कारण होने वाली बीमारी के लिए दिया गया नाम है।

यह 2019 के अंत में चीन के वुहान शहर में शुरू हुआ और तब से दुनिया भर में फैल गया है। COVID-19 पूरा नाम (full form) ‘Corona Virus Disease 2019’ है।

कोरोना वायरस (Covid-19) के विरूद्ध विभिन्न वैक्सीन का निर्माण किया गया है, इसके स्वीकृत वैक्सीन का नाम (Covishield, Covaxin, Sputnik-V, Moderna, Pfizer, Johnson & Johnson vaccine in hindi) सहित टीकाकरण (vaccination) संबंधी जानकारी इस प्रकार है:-

वैक्सीन क्या है? | What is Vaccine?

वैक्सीन (Vaccine in Hindi) क्या होता है? वैक्सीन (टीका) कुछ जीवों के शरीर का प्रयोग करके बनाया गया एक द्रव्य पदार्थ होता है, जिसका उपयोग से मानव शरीर की किसी विशेष बीमारी से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है।

टीकाकरण प्रक्रिया में (vaccination process), रोगज़नक़ (Pathogen) को निष्क्रिय करके या उसके किसी भाग को शरीर में प्रवेश करके उस रोगज़नक़ (Pathogen) के खिलाफ शरीर में प्रतिरक्षा (Immunity) क्षमता का निर्माण किया जाता है।

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Corona Vaccine in Hindi | Vaccine in India | India vaccine in hindi

जब एक निष्क्रिय रोगज़नक़ (Pathogen) या उसके कुछ भाग को शरीर में पेश किया जाता है, तो शरीर में स्मृति कोशिकाओं (Memory Cells) का निर्माण होता है।

ये स्मृति कोशिकाएं उस रोगज़नक़ के साथ पुन: संक्रमण (Infection) होने पर बड़ी संख्या में बढ़ जाती हैं और उस रोगज़नक़ के खिलाफ एंटीबॉडी का निर्माण करती हैं। जो रोगजनकों को नष्ट कर हमारे शरीर की रक्षा करते हैं।

1. कोविशील्ड | Covishield Vaccine

कोविशील्ड को University of Oxford और AstraZeneca ने मिलकर तैयार किया है और इसके उत्पादन के लिए भारत में इसे पुणे की Serum Institute of India (SII) (भारत का सीरम संस्थान) बना रही है।

ये एक तरह का Vaccine Market Sharing (oxford vaccine) है जिसमें प्रति Vaccine की आधी कीमत Oxford के पास जाती है। भारत सीरम इंस्टिट्यूट (SII) के CEO का नाम ‘आदर पूनावाला’ है।

Covishield एक Viral Vector Type की वैक्सीन है। कोविशील्ड (Covishield) दुनिया की सबसे लोकप्रिय Vaccine में से है क्योंकि कई देश इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। Covishield, Mutant Strain (अर्थात वायरस का बदले हुए रूप) के खिलाफ सबसे प्रभावी और असरदार है।

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कोविशील्ड को Single virus के जरिए बनाया गया है, जो कि चिम्पैंजी में पाए जाने वाले एडेनोवायरस (Avian Adenovirus) (चिंपैंजी के मल में पाया जाने वाला वायरस) ChAD0x1 से बनी है।

ये वह वायरस है जो चिंपैंजी में होने वाले cold (जुकाम) का कारण बनता है लेकिन इस वायरस की जेनेटिक सरंचना COVID के वायरस से मिलती है इसलिए एडेनो-वायरस (Adenovirus) का उपयोग कर के शरीर मे एंटीबॉडी (Antibodies) बनाने को वैक्सीन प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity system) को प्रेरित करती है।

कोवीशील्ड को भी WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने मंजूरी दी है। इसकी प्रभावशीलता दर (इफेक्टिवनेस रेट) 70 फीसदी है। यह वैक्सीन कोरोना के गंभीर लक्षणों से बचाती है और संक्रमित व्यक्ति जल्दी ठीक होता है। ये व्यक्ति को वेन्टिलर पर जाने से भी बचाती है।

इसका रखरखाव (storage) रखना बेहद आसान है क्योंकि यह लगभग C से 8°C पर कहीं भी ले जाई जा सकती है इसलिए इसकी उपयोग में लाने के बाद बची हुई वैक्सीन की वायल को फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है।

2. कोवैक्सिन | Covaxin Vaccine

कोवैक्सिन को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक (Bharat Biotech) ने मिलकर तैयार किया है। इसे वैक्सीन बनाने के सबसे पुराने अर्थात पारंपरिक निष्क्रिय (Inactivated platform) ढांचा पर बनाया गया है।

निष्क्रिय ढांचा (Inactivated platform) का मतलब है कि इसमें निष्क्रिय वायरस (Dead Virus) को शरीर में डाला जाता है, जिससे Antibodies पैदा होती है और फिर यही एंटीबॉडी Virus को मारती है।

यह Vaccine लोगों को संक्रमित (positive) करने में सक्षम नहीं है क्योंकि वैक्सीन बनाना बेहद Fine Balance का काम होता है ताकि Virus शरीर में activate न हो सके।

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ये Inactivate Virus शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र (Immune system) को असली वायरस (Active Virus) को पहचानने के लिए तैयार करता है और संक्रमण (Positive) होने पर उससे लड़ता है और उसे खत्म (Negative) करने की कोशिश करता है। इस वैक्सीन से Corona Virus को खतरा है, इंसानों को नहीं।

कोवैक्सीन (Covaxin) की प्रभाविकता (efficiency) 78 फीसदी है। एक Research में ये भी बताया गया है कि यह Vaccine घातक संक्रमण (Fatal infection) और मृत्यु दर (death rate) के जोखिम को 100 फीसदी तक कम करती है।

हाल ही में हुए Research में यह Claim किया गया है कि Covaxin कोरोना के सभी प्रकार (Variants) के खिलाफ effective है।

Note – इन सभी वैक्सीन में सिर्फ Covaxin अकेली वैक्सीन है, जिसे Vaccine बनाने के सबसे पुराने तरीके (Old Technic) से बनाया गया है इसमें कोरोना वायरस के ही (Inactivate Virus अर्थात मृत-स्वरूप (dead mutant) को उपयोग में लाया गया है।

यही एक बड़ा कारण है जोकि covaxin को Corona के 671 वैरिएंट (हाल ही के शोध अनुसार) के खिलाफ प्रभावी बनाता है, चाहे Corona Virus कितना भी Mutant बना ले (अर्थात रूप परिवर्तित कर लें) Covaxin उन सभी पर प्रभावी (effective) रहेगी।

3. स्पुतनिक- V | Sputnik V Vaccine

स्पुतनिक-V (Russia vaccine) इसे मॉस्को, रूस के गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट (Gamaleya Research Institute) ने तैयार किया है, जिसे भारत में डॉ० रेड्डी लैब (Dr Reddys Laboratories Ltd.) द्वारा बनाया जाएगा। इसे भी 2°C-8°C पर स्टोर किया जा सकता है।

स्पुतनिक V (Sputnik V) भी एक Virus Vector Vaccine है, लेकिन इसमें अन्य दूसरी Vaccine में एक बड़ा Difference यही है कि बाकी वैक्सीन को एक निष्क्रिय वायरस (Inactive Virus) से बनाया गया है, जबकि इसमें दो वायरस से बना हैं और जिसे दोनों डोज में अलग-अलग देने होते हैं।

स्पुतनिक-V को भारत के अलावा हर जगह अब-तक की सबसे प्रभावी वैक्सीन (effective vaccine) माना गया है। इस स्तर पर भारत की सबसे इफेक्टिव वैक्सीन है। जो स्पुतनिक V 91.6 % प्रभावी है। इसलिए इसे सबसे अधिक प्रभावी वैक्सीन कह सकते है।

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यह श्वसन रोग और अन्य सर्दी, जुकाम पैदा करने वाले एडेनोवायरस-5 (Ad-5) और एडेनोवायरस-26 (Ad-26) अर्थात 2 अलग-अलग प्रकार के Virus पर आधारित है। Vaccine in Hindi

यह कोरोना वायरस में पाए जाने वाले कांटेदार प्रोटीन (Spike Protein- वह प्रोटीन जो शरीर की कोशिकाओं अर्थात सेल्स में एंट्री लेने में मदद करता है) की नकल करती है, जो शरीर पर सबसे पहले हमला (effect) करता है।

वैक्सीन शरीर में पहुंचते ही प्रतिरक्षा तंत्र (Immune system) सक्रिय हो जाता है और शरीर में एंटीबॉडी बनने लगती है। यही एंटीबॉडी शरीर को Coronavirus से रोकती (negative) हैं।

स्पुतनिक की Single dose वाली Vaccine अर्थात Sputnik Light, चूंकि स्पुतनिक वैक्सीन की दोनों dose में दो अलग-अलग वायरस उपयोग होते है, तो Sputnic Light वैक्सीन असल में स्पुतनिक-V वैक्सीन का पहला डोज ही है।

Sputnik-V में दो अलग-अलग वैक्सीन तीन हफ्ते के अंतराल के बाद लगाए जाते हैं। कंपनी ने दावा किया है कि स्पुतनिक-V का पहला डोज (single dose) भी कोरोना संक्रमण से बचाने में कारगर है और इसे ही Sputnik Light के रूप में जाना जाता है।

स्पुतनिक लाइट का इफेक्टिवनेस 79.4% है, जोकि अन्य Vaccine के double dose से भी अधिक है। इसकी मंजूरी भारत में मिल गई है। जिसमे एक डोज में ही अधिक टीकाकरण (Vaccination in India) किया जा सकेगा। जिससे टीकाकरण में तेजी भी लाई जा सकेगी।

4. 2-Dg | 2-deoxy-D-glucose

कोरोना (Covid-19) के इलाज के लिए यह Oral Powder (Medicine), 2Dg (जिसका पूरा नाम- 2-Deoxy-D-glucose) पुरे विश्व की पहली दवाई है। जिसकी खोज DRDO (Defence Research and Development Organisation) के INMAS (Institute of Nuclear Medicine & Allied Sciences) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया है।

यह भारत ही एकमात्र देश है, जिसने यह Oral दवा अर्थात पानी में घोलकर पीने वाली दवाई (first oral India vaccine in hindi) अपने देश में सबसे पहले बनायीं।

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कोरोना के रोकथाम के लिए भारत की नई Oral दवा D2-Dg (2-Deoxy-D-glucose) पाउच के रूप में भारत सरकार के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी द्वारा दिनाँक 17.05.2021 कोविड रोगियों के लिए जारी किया जा रहा है।

इसका निर्माण प्रसिद्ध Indian Medicine निर्माता कंपनी Dr. Reddy Laboratries, Hyderabad द्वारा किया जा रहा है। अभी इस दवा के 10000 पाउच जारी किये जा रहे हैं। माह जून 2021 से इस Oral दवा D-2Dg पाउच के 1 लाख पाउच प्रति सप्ताह उपलब्ध कराये जाएंगे।

D-2Dg पाउच Oral दवा की विशेषताएं

  1. इस दवा को सुबह शाम पानी में घोलकर लिया जा सकेगा।
  2. इस दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा।
  3. इससे रोगी की ऑक्सीज़न पर निर्भरता दूर हो जाएगी।
  4. इस दवा लेने से, वायरस इसे ग्लूकोज़ समझकर खाना प्रारंभ कर देगा और इसकी बढ़ोतरी क्षमता रुक जाएगी।

Noteपहले चरण में यह दवा सिर्फ अस्पतालों में कोविड मरीजों को डॉक्टरों की सलाह पर ही दी जाएगी। स्वस्थ लोगों को कोविड रोकथाम दवा के रूप में यह दवा खुले बाजार में एक निवारक दवा के रूप में भी उपलब्ध कराई जाएगी। Vaccine in Hindi

5. Moderna और Pfizer Vaccine

इन तीनों वैक्सीन के अलावा, दुनिया में अन्य वैक्सीन (टीके) और बनाये हैं – मॉडर्ना (Moderna) और फाइजर (Pfizer), जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) हैं। जिन्हें आपातकालीन स्वीकृति दी गई है लेकिन वर्तमान में भारत में मान्य नहीं हैं।

जहां मॉडर्ना वैक्सीन (Moderna vaccine) को -20 डिग्री पर स्टोर करना होता है वहीं फाइजर वैक्सीन (Pfizer vaccine) को -70 डिग्री सेल्सियस (-70°C) से -75 डिग्री सेल्सियस (-75°C) पर स्टोर करना पड़ता है। यही कारण है कि भारत इन टीकों को मंजूरी देने में पिछड़ रहा है क्योंकि यह है भारत में ऐसी प्रणाली विकसित करना मुश्किल है।

इस वैक्सीन के लिए जिसमें इस तापमान बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा एक बात यह भी है कि इस वैक्सीन को बनाने में अलग-अलग परम्परागत तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। Vaccine in Hindi

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जीवित या मृत वायरस को पारंपरिक वैक्सीन (Conventional vaccines) के माध्यम से शरीर के रक्त प्रवाह में Inject किया जाता है। इसमें कई पदार्थ भी होते हैं, जो एक प्रतिरोधी प्रक्रिया (Resistant process) के उत्पादन के लिए आवश्यक है। लेकिन Covid-19 की नई वैक्सीन में एक तरह के न्यूक्लिक अम्ल संबंधी Messenger RNA (mRNA) का इस्तेमाल किया गया है।

यह Messenger RNA (mRNA) एक आनुवंशिक तंत्र (Genetic Mechanism) का संकेत देता है, जो Covid-19 एंटीबॉडी का निर्माण करता है, जो वायरस के संकेतों को नष्ट कर देता है। अर्थात इस प्रक्रिया में वायरस को शरीर में Direct Inject नहीं किया जाता है।

Note- तुलनात्मक अध्ययन की जानकारी के लिए है क्योंकि भारत में स्वीकृत तीनों वैक्सीन (कोविशील्ड, कोवैक्सिन और स्पुतनिक-V) केवल Covid-19 को गंभीर होने और वेंटिलेटर पर जाने से रोकते हैं, क्योंकि ये तीन वैक्सीन गंभीर बीमारी के जोखिम से बचते हैं और रक्षा करता हैं। India vaccine in hindi

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2 Comments
  1. Yogendra says

    प्रोटीन से सम्बंधित प्रश्न और उत्तर – GKinupsc

  2. Ghanshyam Manikpuri says

    आपने बहुत ही अच्छी जानकारी दी है, बहुत अच्छे तरीके से हर बात को समझाया है।

    आपकी हरेक बात आसानी से समझ में आ गई है।

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